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आठ दिन में छह मौतें, आपदा-राहत के कोई इंतजाम नहीं

  रायपुर। प्रदेश में हीट वेव (ग्रीष्म लहर) अपने चरम पर है । और आपदा-राहत, स्वास्थ्य ,पशुधन ,नगरीय निकाय विभाग उतनी ही ढिलाई पर है। अब तक किस...

 

रायपुर। प्रदेश में हीट वेव (ग्रीष्म लहर) अपने चरम पर है । और आपदा-राहत, स्वास्थ्य ,पशुधन ,नगरीय निकाय विभाग उतनी ही ढिलाई पर है। अब तक किसी भी विभाग ने राहत, बचाव को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया है। अफसर एसी कमरे में बैठकर मौतों का आंकड़ा गिन रहे हैं।

प्रदेश के उत्तर से दक्षिण तक सूर्य की तपिश दिन में 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर गई है। और रात का न्यूनतम तापमान भी 30-32 तक छू गया है। नोतपे के पहले दिन से आज तक आठ दिनों में पूरे प्रदेश में 8 व्यक्तियों की मौत तेज गर्मी में चक्कर आने से हो चुकी है। लेकिन राहत का उपाय करने वाले सरकारी विभागों को लगता है लू गई है। राहत आयुक्त का भी अता पता नहीं है। मानों उनका काम केवल बाढ़ राहत का ही है। मौसम विभाग रोज ब रेज यलो,आरेंज अलर्ट जारी कर रहा। इस आधार पर स्वास्थ्य विभाग या राहत आयुक्त को मेडिकल बुलेटिन जारी करना होता है लेकिन नौ दिनों में एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ। बस बचाव के बयान जारी कर इतिश्री कर ली गई। न रैन बसेरों की व्यवस्था न प्याऊ। अस्पतालों में तपते सीलिंग पंखों की मार। कूलर हैं तो पानी नहीं। सडक़ों पर डामर पिघल रहा है और पशुधन विभाग को  ऐसी सडक़ों पर जानवरों के फंसकर मरने का इंतजार कर रहा है।

 मौसम विभाग के अनुसार हीट वेव मैदानी क्षेत्र में 40 और पहाड़ी इलाकों में 30 डिग्री से उपर तापमान में काउंट हो जाता है । और सीनियर हीटवेव 40 सेे 6.4 डिग्री उपर होने पर होता है।प्रदेश के दोनों ही क्षेत्रों में तापमान 40 से कहीं उपर जा चुका है। कल मैनपाट, जिसे छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है में कल पारा 41 डिग्री पर रहा। लेकिन उत्तर से दक्षिण छत्तीसगढ़ तक इससे निपटने कोई सरकारी इंतजाम नहीं। नई नई सरकार चील्ड कमरों में  प्रशिक्षण पर हैं और आदमी भ_ी में तप रहा है। जो सह नहीं पाए ऐसे छह लोग दम तोड़ चुके हैं। और हीट वेव अभी जारी है। और इसका असर बना रहेगा। आज तापमान 44 डिग्री पर है, और आज की रात वार्म नाइट का भी अलर्ट है। उस पर नमी (ह्यूमिडिटी) 30-31प्रतिशत, जो उल्टी दस्त, स्किन और आई डिजीज़, दमे की शिकायत वालों को हार्ट की समस्या का कारण बनती है। ऐसी स्थिति से बाहर रखने सरकारी विभागों को प्रबंध करना ही ड्यूटी है। लेकिन अब तक कोई इंतजाम नहीं किए गए। इसके उलट जुलाई अगस्त में आने वाली बाढ़ से निपटने के उपाय शुरू कर दिए गए हैं। ताकि उस पर लाखों खर्च कर सकें।


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