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मुख्यमंत्री बघेल ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास और समृद्धि की कामना के साथ कन्याकुमारी में की पूजा अर्चना

  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 23 नवम्बर को प्रसिद्ध कन्या कुमारी के भगवती अम्मन का दर्शन किया। सुबह-सुबह मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश ने प...

 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 23 नवम्बर को प्रसिद्ध कन्या कुमारी के भगवती अम्मन का दर्शन किया। सुबह-सुबह मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश ने पारंपरिक और पूरे विधि विधान के साथ माता के दर्शन किये और प्रदेश के सर्वांगीण विकास और समृद्धि की कामना के साथ कन्याकुमारी में की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद मांगा।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ खनिज विकास निगम के चेयरमैन गिरिश देवांगनसलाहकर विनोद वर्माप्रदीप शर्मारूचिर गर्ग के अलावे विजय भाटिया मौजूद थे। इस मंदिर के बारे में श्रद्धालुओं की बड़ी आस्था है। आपको बात दें कि रविवार को ही मुख्यमंत्री दो दिवसीय दौरे पर गये थे।

वो एआईसीसी के जनरल सिकरेट्री इंचार्ज की मां की श्रद्धांजलि सभा में रविवार को शरीक हुएउसके बाद आज सुबह उन्होंने माता अम्मन देवी के दर्शन किये।

कन्याकुमारी अम्मन मंदिर समुद्र तट पर स्थित है। पूर्वाभिमुख इस मंदिर का मुख्य द्वार केवल विशेष अवसरों पर ही खुलता हैइसलिए श्रद्धालुओं को उत्तरी द्वार से प्रवेश करना होता है। इस द्वार का एक छोटा-सा गोपुरम है। करीब 10 फुट ऊंचे परकोटे से घिरे वर्तमान मंदिर का निर्माण पांड्य राजाओं के काल में हुआ था। देवी कुमारी पांड्य राजाओं की अधिष्ठात्री देवी थीं। मंदिर से कुछ दूरी पर सावित्री घाटगायत्री घाटस्याणु घाट एवं तीर्थघाट बने हैं। इनमें विशेष स्नान तीर्थघाट माना जाता है। तीर्थघाट के स्नान के उपरांत भक्त मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं।

घाट पर सोलह स्तंभ का एक मंडप बना है। मंदिर के गर्भगृह में देवी की अत्यंत सौम्य प्रतिमा विराजमान है। विभिन्न अलंकरणों से सुशोभित प्रतिमा केवल दीपक के प्रकाश में ही मनोहारी प्रतीत होती है। देवी की नथ में जडा हीरा एक अनोखी जगमगाहट बिखेरता है। कहते हैं बहुत पहले की बात हैमंदिर का पूर्वी द्वार खुला होता था तो हीरे की चमक दूर समुद्र में जाते जहाजों पर से भी नजर आती थीजिससे नाविकों को किसी दूरस्थ प्रकाश स्तंभ का भ्रम होता था। इस भ्रम में दुर्घटना की आशंका रहती थी। इसी कारण पूर्वी द्वार बंद रखा जाने लगा। अब यह द्वार बैशाख ध्वजारोहणउत्सवरथोत्सवजलयात्रा उत्सव जैसे विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है। माना जाता है कि चैतन्य महाप्रभु इस मंदिर में जलयात्रा पर्व पर आए थे। इसी परिसर में महादेव मंदिरकाशी विश्वनाथ मंदिर और चक्रतीर्थ के दर्शन भी किए जा सकते हैं।

 

 


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